हिंदी माह के अवसर पर कहानी-कथन
🦊 “रंगा सियार” — प्रार्थना सभा, 2 सितंबर
आज हिंदी माह के अवसर पर प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों के समक्ष “रंगा सियार” नामक रोचक एवं शिक्षाप्रद कहानी का कहानी-कथन आयोजित किया गया।
कहानी
के माध्यम से विद्यार्थियों को सच्चाई, ईमानदारी, आत्मविश्वास और अपने वास्तविक स्वरूप को स्वीकार करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। कहानी ने विद्यार्थियों को मनोरंजन के साथ-साथ जीवन की एक उपयोगी सीख भी प्रदान की।
📚 मेरा सुझाव है कि विद्यार्थी केवल कहानी सुनकर न रुकें, बल्कि पुस्तकालय से हिंदी की अच्छी कहानियाँ और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ें। हर नई पुस्तक हमें एक नई सोच, नया विचार और नया ज्ञान देती है।
“पढ़िए, सीखिए और हर दिन एक नई बात जानिए।”
🌱📖
हमारे
विद्यालय
के पुस्तकालय में हिंदी पुस्तकों की विशेष पुस्तक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है। सभी विद्यार्थियों से आग्रह है कि वे पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन करें और अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ने के लिए अवश्य चुनें।
— सुमित शर्मा
पुस्तकालयाध्यक्ष
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2, विजयवाड़ा
🦊 “रंगा सियार”
लेकिन ध्यान रखिए बच्चों…
यह केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि हमारे जीवन के लिए एक बहुत बड़ी सीख है।
🌳 कहानी शुरू होती है…
एक घने जंगल में एक सियार रहता था।
एक दिन भोजन की तलाश में घूमते-घूमते वह गलती से
एक रंगरेज के घर में पहुँच गया।
वहाँ वह एक बड़े बर्तन में गिर गया,
जिसमें नीला रंग भरा हुआ था।
जब वह बाहर निकला तो उसका पूरा शरीर
नीले रंग का हो चुका था।
सियार ने पानी में अपना प्रतिबिंब
देखा और सोचने लगा—
“अरे! मैं तो बिल्कुल अलग और अद्भुत
दिखाई दे रहा हूँ!”
वह जंगल में वापस पहुँचा।
जंगल के सभी जानवरों ने जब उसे देखा
तो वे डर गए।
शेर बोला—
“यह कौन-सा विचित्र प्राणी है?”
हाथी, हिरण, बंदर और दूसरे जानवर भी उससे डरने
लगे।
चालाक सियार ने तुरंत अवसर का लाभ
उठाया और कहा—
“डरो मत! मुझे स्वयं भगवान ने इस जंगल
का राजा बनाकर भेजा है। अब से मैं तुम सबका राजा हूँ!”
सभी जानवरों ने उसकी बात पर विश्वास
कर लिया।
सियार आराम से राजा बनकर रहने लगा।
दूसरे जानवर उसके लिए भोजन लाते और उसकी सेवा
करते।
कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चलता रहा।
लेकिन एक दिन…
रात के समय दूर जंगल में कुछ सियारों
ने हुआँ-हुआँ करना शुरू किया।
अपने साथियों की आवाज सुनते ही वह
नीला सियार अपनी असली आदत भूल गया।
वह भी जोर-जोर से—
“हुआँ… हुआँ… हुआँ!” 🦊
करने लगा।
जंगल के जानवर समझ गए कि यह कोई
दिव्य प्राणी नहीं, बल्कि एक साधारण सियार है, जो नीले रंग में रंग गया है।
उसकी सारी पोल खुल गई।
जानवरों को अपनी गलती का पता चला और
रंगे हुए सियार का झूठ सामने आ गया।
🌟 कहानी से सीख
बच्चों!
इस कहानी की सबसे बड़ी सीख है—
“दिखावा ज्यादा दिनों तक नहीं चलता,
सच्चाई एक दिन सामने जरूर आती है।”
हमें कभी भी किसी दूसरे का रूप,
नाम, पद या
दिखावा देखकर स्वयं को बड़ा नहीं समझना चाहिए।
हमें अपनी पहचान अपने ज्ञान, मेहनत, ईमानदारी और अच्छे व्यवहार से बनानी चाहिए।
याद रखिए—
🌟 “जो हम वास्तव में हैं, वही
बनकर रहना सबसे बड़ी ताकत है।” 🌟
और बच्चों, एक और महत्वपूर्ण बात—
किताबें हमें ऐसी ही कहानियों के
माध्यम से जीवन की सच्चाई और अच्छे संस्कार सिखाती हैं।
इसी उद्देश्य से हमारे विद्यालय के
पुस्तकालय में हिंदी
पुस्तकों की विशेष पुस्तक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है।
मैं आप सभी विद्यार्थियों से आग्रह
करता हूँ—
📚 पुस्तकालय आइए।
📖
हिंदी की अच्छी पुस्तकें पढ़िए।
💡
नई बातें सीखिए।
🌱
अपने ज्ञान और कल्पना की दुनिया को बड़ा बनाइए।
“एक अच्छी पुस्तक एक अच्छे मित्र के
समान होती है।”
🙏 विशेष धन्यवाद
साथ ही, मैं विशेष रूप से आस्था
जी, हिंदी
शिक्षिका , प्रशिक्षित
स्नातक शिक्षिका (हिंदी) का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने इस गतिविधि के लिए मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण देकर इसे और
प्रभावशाली बनाने में सहयोग किया।
आस्था जी,, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 🌷🙏
और मेरे प्यारे विद्यार्थियों—
कहानी सुनो, पुस्तक पढ़ो, ज्ञान बढ़ाओ और अपने जीवन में अच्छे संस्कार अपनाओ।
हिंदी पढ़ेंगे—ज्ञान बढ़ाएँगे।
पुस्तक पढ़ेंगे—भविष्य सँवारेंगे।
सच्चाई अपनाएँगे—जीवन में आगे
बढ़ेंगे।
जय हिंद!
📚 पढ़ेगा भारत — बढ़ेगा भारत!
— सुमित
शर्मा
पुस्तकालयाध्यक्ष
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2, विजयवाड़ा
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